श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज एक साथ रिकॉर्ड 20 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ नया इतिहास बनाया है। आज सुबह 9.26 बजे ध्रुवीय प्रक्षेपण यान पी.एस.एल.वी.-सी. 34 का सफल प्रक्षेपण किया गया। यह प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से किया गया। इस सैटेलाइट से कई फायदे होगें जिसमें अब भारत में किसी भी जगह को अंतरिक्ष से देखने की क्षमता भी हासिल होगी। इस सैटेलाइट के जरिए भारत ये सही सही जान पाएगा कि यहां पर किस तरह के और कितने जंगल हैं।
ये होंगे बड़े फायदे
-किसी भी इलाके की .65 मीटर तक की तस्वीर लेने की क्षमता।
-भूकंप तूफान और दूसरी आपदा में मदद।
-खींची गई तस्वीर से तापमान का पता चलेगा।
-जंगल में लगी आग को बुझाना आसान होगा।
-सिक्योरिटी एजेंसियों को भी उपग्रह से मिलेगी मदद।
-भारत में किसी भी जगह को अंतरिक्ष से देखने की क्षमता।
-अंतरिक्ष से हाई रिजोल्यूशन की तस्वीर मुमकिन।
-बॉर्डर पर नजर रखने में मिलेगी मदद, घुसपैठ पर होगी पैनी नजर।
-टाउन प्लानिंग और डिजाइनिंग में मदद।
-अंतरिक्ष से वीडियो कंट्रोल सेंटर भेजना आसान।
-वीवीआईपी सुरक्षा, आतंकियों और अपराधियों की निगरानी संभव।
-भूकंप तूफान और दूसरी आपदा में मदद।
-खींची गई तस्वीर से तापमान का पता चलेगा।
-जंगल में लगी आग को बुझाना आसान होगा।
-सिक्योरिटी एजेंसियों को भी उपग्रह से मिलेगी मदद।
-भारत में किसी भी जगह को अंतरिक्ष से देखने की क्षमता।
-अंतरिक्ष से हाई रिजोल्यूशन की तस्वीर मुमकिन।
-बॉर्डर पर नजर रखने में मिलेगी मदद, घुसपैठ पर होगी पैनी नजर।
-टाउन प्लानिंग और डिजाइनिंग में मदद।
-अंतरिक्ष से वीडियो कंट्रोल सेंटर भेजना आसान।
-वीवीआईपी सुरक्षा, आतंकियों और अपराधियों की निगरानी संभव।
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